आपको सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि भारतीय हिंदी परिषद की छत्रछाया में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हमारे महाविद्यालय के हिंदी विभाग व शोध केंद्र द्वारा 10-11 सितंबर 2016 को ‘पाठालोचन की प्रविधि : समस्याएँ और संभावनाएँ’ विषय पर आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी में आप सादर आमंत्रित हैं। इस संगोष्ठी के उपविषय हैं
1. पाठालोचन का स्वरूप और उसके विभाग तथा प्रकार
2. पाठालोचन का विकास और इतिहास
3. पाठालोचन की विभिन्न प्रविधियाँ (पद्धतियाँ)
4. वाचनकला और लिपिविज्ञान का अंतर्संबंध
5. पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, संरक्षण और प्रकाशन : समस्या और उपाय
6. पाठ-विकृतियाँ : कारण और निवारण
7. क्षेपक या प्रक्षेप (Interpolation)
8. पाठ-निर्माण की समस्याएँ और समाधान
9. आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ. माताप्रसाद गुप्त, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी, आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र, आचार्य किशोरीदास वाजपेयी, बाबू श्यामसुंदर दास, लाला भगवानदीन, जगन्नाथदास रत्नाकर, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, डॉ. पारसनाथ तिवारी, डॉ. ब्रजेश्वर वर्मा, डॉ. उदयभानु सिंह, डॉ. कन्हैया सिंह, डॉ. सियाराम तिवारी, डॉ. पीतांबरदत्त बड़थ्वाल, नरोत्तम स्वामी, किशोरीलाल गुप्त, मुनि जिनविजय आदि मनीषियों का पाठालोचन में योगदान।

कृपया ऊपर दिए गए उपविषयों अथवा मुख्य विषय से संबंधित किसी अन्य उपविषय पर अपना आलेख (कृति देव 010 या यूनिकोड फांट और वर्ड/पेजमेकर में) तैयार कर 31 जुलाई 2016 तक profess63@gmail.com पर अनिवार्यतः भेजने का कष्ट करें, जिससे आलेखों से सजी हुई पुस्तक को प्रकाशनोपरांत उद्घाटन सत्र में विमोचित करवाया जा सके।

आपको यह बताते हुए गौरवानुभूति हो रही है कि 1964 ई. में स्थापित हमारा महाविद्यालय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की एक अग्रणी संस्था के रूप में विख्यात है और केन नदी के तट पर महर्षि बामदेव द्वारा बसाई गई (अनेक पौराणिक/ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी) नगरी बाँदा के हृदय में स्थित है। कालिंजर, खजुराहो, महोबा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों से घिरे हुए बाँदा नगर से पौराणिक महातीर्थ चित्रकूट 70 किमी., प्रयाग (इलाहाबाद) 200 किमी., झाँसी 210 किमी., कानपुर 140 किमी. और लखनऊ (वाया फतेहपुर) 205 किमी. दूर हैं। हजरत निजामुद्दीन, आगरा, ग्वालियर, झाँसी, हावड़ा, वाराणसी, इलाहाबाद, मानिकपुर, कानपुर, लखनऊ, दुर्ग, रायपुर, विलासपुर, शहडोल, जबलपुर, मुंबई, इटारसी आदि नगरों से बाँदा सीधी रेलसेवाओं से जुड़ा हुआ है। हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेलमार्ग पर स्थित फतेहपुर से भी बाँदा सड़कमार्ग से जुड़ा हुआ है और मात्र 80 किमी. दूर है।